भागवत कथा वाचक विशाखा दुबे का शव पहुंचा गांव,मची चीख पुकार।
मीरजापुर विंध्याचल जनपद के विंध्याचल थाना अंतर्गत देवरी गांव की 24 वर्षीय भागवत कथा वाचक विशाखा दुबे का शव गांव पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। पूरे गांव में मातम का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया जा रहा है कि हरियाणा के गुरुग्राम स्थित Paras Hospitals में उपचार के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण विशाखा की हालत गंभीर हुई और समय रहते उचित इलाज नहीं मिला। आरोप है कि मौत के बाद करीब 24 घंटे तक अस्पताल प्रशासन ने शव नहीं सौंपा, जिससे परिजनों में आक्रोश व्याप्त हो गया था। काफी जद्दोजहद के बाद शव परिजनों को सौंपा गया। मौत के पांचवें दिन जैसे ही विशाखा दुबे का पार्थिव शरीर देवरी गांव पहुंचा, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। महिलाओं की करुण क्रंदन से माहौल गमगीन हो उठा। परिजनों के अनुसार, विशाखा दुबे दो भाइयों और तीन बहनों में सबसे छोटी थीं। मात्र 10 वर्ष की आयु में वह वृंदावन चली गई थीं और वहीं से उन्होंने धार्मिक शिक्षा ग्रहण की। शिक्षा पूर्ण करने के बाद पिछले 8 वर्षों से लगातार भागवत कथा वाचन कर रही थीं। कम उम्र में ही उन्होंने धार्मिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली थी।मृतका के भाई ने अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। पिता रामधर दुबे संतों की सेवा में जुड़े रहते हैं, जबकि माता का देहांत तीन वर्ष पूर्व ही हो चुका है। अब परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक व्याप्त है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।





