जौनपुर, आजमगढ़ और मऊ के पारंपरिक स्वाद को मिलेगा नया विस्तार
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय को उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी “एक जिला–एक व्यंजन” योजना में महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है। प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की इस पहल के तहत विश्वविद्यालय को “ज्ञान भागीदार” के रूप में नामित किया गया है।
हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन को योजना से संबंधित प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इस रिपोर्ट में शासन के निर्देशानुसार जौनपुर, आजमगढ़ और मऊ जिलों के दो-दो पारंपरिक व्यंजनों एवं खाद्य उत्पादों की पहचान कर उनका विस्तृत विवरण तैयार किया गया है। दस्तावेज में इन उत्पादों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थानीय महत्व और संभावित बाजार विस्तार को ध्यान में रखते हुए सुझाव शामिल किए गए हैं।
इस योजना का उद्देश्य केवल परंपरागत स्वाद को संरक्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें संगठित बाजार से जोड़कर स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देना भी है। इसके माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
विश्वविद्यालय को तीनों जिलों के चयनित व्यंजनों का दस्तावेजीकरण, गुणवत्ता मानकों का निर्धारण, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग रणनीति तथा बाजार से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। आने वाले समय में खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता मानक, लेबलिंग, भंडारण क्षमता और मूल्य श्रृंखला विकास जैसे बिंदुओं पर विशेष कार्य किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों का मानना है कि यह पहल क्षेत्र की समृद्ध खानपान परंपरा को नई पहचान देगी। स्थानीय मिठाइयों और पारंपरिक उत्पादों को यदि संगठित रूप से प्रस्तुत किया गया, तो छोटे उद्यमियों और कारीगरों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है।
बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षकों ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर अपने सुझाव साझा किए और इसे पूर्वांचल क्षेत्र के लिए दूरगामी दृष्टि से लाभकारी बताया।





