बहराइच (उत्तर प्रदेश)। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। वीडियो को बहराइच का बताया जा रहा है, जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग की सत्र 2026–27 की किताबें ट्रक में कबाड़ की तरह लदी दिखाई दे रही हैं और ट्रक कथित रूप से कबाड़ी की दुकान पर खड़ा बताया जा रहा है।
नोट: यह खबर पूरी तरह से विपक्षी नेताओं—अखिलेश यादव और कांग्रेस—के सार्वजनिक बयानों/ट्वीट पर आधारित है। स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

सपा प्रमुख का हमला: “भाजपा ने शिक्षा को रद्दी कर दिया”
अखिलेश यादव ने वीडियो साझा करते हुए लिखा कि भाजपा ने शिक्षा को “रद्दी” बना दिया है। उनके अनुसार, भाजपा सरकार ने पहले “विलय” के नाम पर 27,000 सरकारी स्कूल बंद करने की साज़िश की और राज्यसभा में स्वीकार किया है कि पिछले पांच वर्षों में 18,727 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि शिक्षा से जागरूकता और वैज्ञानिक चेतना आती है, जो भाजपा की “दकियानूसी और संकीर्ण सोच” को चुनौती देती है। उन्होंने इसे गरीब, शोषित-वंचित समाज के बच्चों के भविष्य के खिलाफ बड़ा षड्यंत्र बताया और कहा कि सरकारी स्कूल बंद होने से निजी स्कूलों की फीस और अन्य खर्चों का बोझ बढ़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि मिड-डे मील जैसी योजनाओं पर असर पड़ेगा और इसका नकारात्मक प्रभाव बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास पर पड़ेगा। सपा प्रमुख ने संकेत दिया कि आगामी चुनाव में शिक्षा बड़ा मुद्दा बन सकता है।

कांग्रेस का आरोप: “16 हजार किताबें, 4 रुपये किलो में कबाड़ी को”
वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ट्वीट में दावा किया कि बहराइच में बच्चों को बांटने के लिए आईं करीब 16,000 किताबें कथित तौर पर 4 रुपये किलो में कबाड़ी को बेच दी गईं। कांग्रेस के अनुसार, मामला सामने आने पर ये किताबें एक ट्रक में लोड पाई गईं, जिन्हें उत्तराखंड भेजा जाना था।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा राज में “शिक्षा का सौदा” किया जा रहा है और हर साल स्कूलों पर तालाबंदी की जा रही है। पार्टी ने इसे भ्रष्टाचार का उदाहरण बताते हुए कहा कि “बच्चे भले न पढ़ें, बस BJP की तिजोरी में माल बढ़े”—ऐसा हाल बना दिया गया है।
सियासी संग्राम तेज
वायरल वीडियो के बाद विपक्ष ने भाजपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया है। वहीं, इस मामले में प्रशासन या संबंधित विभाग की आधिकारिक पुष्टि/स्पष्टीकरण खबर लिखे जाने तक सामने नहीं आया है।
फिलहाल, बहराइच की यह घटना सियासी बयानबाज़ी के केंद्र में है और शिक्षा का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बनता दिख रहा है।



[ध्यान दें 👉: खबर और फोटो ऑफिशियल ट्विटर से लिया गया है]





