ऑपरेशन सिंदूर- शशि थरूर के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) में शामिल होने पर क्यों भड़क रही कांग्रेस!

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ऑपरेशन सिंदूर क्यों आवश्यक था, मित्र देशों को यह बताएंगे सांसद…

नई दिल्ली। पहलगाम में आतंकवादी हमले नरसंहार के बाद भारत का पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों पर’ऑपरेशन सिंदूर’ अंतर्गत मिसाइल व हवाई हमले कर आतंकवाद के नव प्रमुख ठिकानों को नित्सो नाबूत करने के बाद भारत-पाक के बीच सीजफायर की घोषणा के बाद और सिंधु जल समझौता को निलंबित करने के बीच भारत अपने पक्ष को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती के साथ रखने व पाकिस्तान के आतंकवादी प्रसार की गतिविधियों में संलिप्प्ट होने के पक्के सबूत के साथ विश्व के कई देशों में सांसदों का डेलिगेशन बनाकर भेजने की योजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है, जिसमें सत्ता पक्ष सहित विपक्ष के भी कई सांसद शामिल होंगे और इसमें कई हो चेहरे हैं जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बातों को बहुत ही स्पष्ट के साथ और मजबूती के साथ रख सकते हैं उन्हें चेहरों में एक कांग्रेस नेता व सांसद शशि थरूर के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) में शामिल होने पर कांग्रेस द्वारा विवाद इसलिए खड़ा जा रहा, क्योंकि केंद्र सरकार ने कांग्रेस द्वारा सुझाए गए चार सांसदों—आनंद शर्मा, गौरव गोगोई, सैयद नासिर हुसैन, और राजा बरार—के नामों को नजरअंदाज कर शशि थरूर को डेलिगेशन का नेता नियुक्त किया। यह डेलिगेशन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख वैश्विक मंचों पर प्रस्तुत करने के लिए बनाया गया था।

सांसद डेलिगेशन में शामिल डेलिगेशन का नेतृत्व करने वाले प्रमुख सांसद
सांसद डेलिगेशन में शामिल डेलिगेशन का नेतृत्व करने वाले प्रमुख सांसद

कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने पार्टी से बिना चर्चा किए थरूर का नाम शामिल किया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने परोक्ष रूप से थरूर पर निशाना साधते हुए कहा कि “कांग्रेस में होना और कांग्रेस का होना, दोनों में ज़मीन-आसमान का फर्क है,” और सरकार ने इस मामले में “शरारत” दिखाई। पार्टी का मानना है कि किसी सांसद को सरकारी प्रतिनिधिमंडल में शामिल करने से पहले पार्टी नेतृत्व से सहमति लेना लोकतांत्रिक परंपरा है, जो इस मामले में नहीं हुई। इसके अलावा, थरूर के हालिया बयानों, जैसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और केंद्र सरकार की नीतियों का समर्थन करना, ने भी पार्टी के भीतर असहजता पैदा की। कुछ नेताओं का मानना है कि थरूर ने पार्टी लाइन से हटकर बयान दिए और “लक्ष्मण रेखा” पार की। कांग्रेस के कुछ नेताओं को थरूर की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय छवि और स्वतंत्र रुख से भी असहजता है, जिसे बीजेपी ने तंज कसते हुए उजागर किया।

हालांकि, थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने राष्ट्रीय हित में एक भारतीय नागरिक के तौर पर बयान दिए, न कि कांग्रेस प्रवक्ता के रूप में, और वह दी गई जिम्मेदारी को सम्मान के साथ निभाएंगे। इस विवाद ने कांग्रेस के आंतरिक मतभेदों को और उजागर कर दिया है, हालांकि भाजपा ने इसमें कहा है कि शशि थरूर नेशन फर्स्ट रखते हैं इसलिए कांग्रेस को इससे दिखते हो रही हैं लेकिन इस डेलिगेशन में शशि थरूर को एक विशेष जिम्मेदारी दी गई है।

Azamgarh News
Author: Azamgarh News

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