जनपद के किसान भाई से अपने खेतों में फसल अवशेष कदापि न जलायें-उप क़ृषि निदेशक
“फसल अवशेष नही जलायें, फसल अवशेष का कम्पोस्ट बनायें”
“मृदा स्वास्थ न गिरने पाये, सतत लाभ खेती से पाये।”
किसान भाई खेतों में फसल अवशेष कदापि न जलायें, बल्कि फसल अवशेष प्रबन्धन यन्त्रों से प्रबन्धन कर फसल अवशेषों को सड़ाकर मृदा स्वास्थ्य संरक्षित करें, फसल अवशेष नहीं जलायें, वातावरण को दूषित होने से बचायें।
फसल अवशेष जलाने से होने वाली हानियों-
1. फसल अवशेषों को जलाने से उनके जड़, तना पत्तियों में संचित लाभदायक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
2. फसल अवशेषों को जलाने से मृदा ताप में बढ़ोत्तरी होती है, जिसके कारण मृदा के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक दशा पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। “फसल अवशेष नही जलायें, जीव जन्तुओं का स्वास्थ्य बचायें।”
3. पादप अवशेष एवं मृदा में उपलब्ध लाभदायक मित्र कीट जलकर मर जाते हैं जिसके कारण वातावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। “खेतों में यदि आग लगायें, मित्र कीट भी सब जल जायें।”
4. फसल अवशेषों को जलाने से उत्पन्न गैसों के कारण सामान्य वायु की गुणवत्ता में कमी आती है, जिससे आँखों में जलन एवं त्वचा रोग तथा सूक्ष्म कणों के कारण जीर्ण हृदय एवं फेफड़े की बीमारी के रुप में मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
5. श्वसन तन्त्र प्रभावित होने के कारण गम्भीर बीमारियों हो सकती है।
6. पशुओं के चारे की व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। निराश्रित गौ आश्रय स्थलों को फसल अवशेष दान करें, जो उनके चारे व विछावन में उपयोग हो सकती है।
7. कम्बाइन हार्वेस्टर सिस्टम (सुपर एस०एम०एस०), हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, जीरो टिल सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, श्रब मास्टर, पैडी स्ट्राचापर, श्रेडर मल्चर, रोटरी स्लेशर, हाइड्रोलिक रिवर्सेबल एम०बी० प्लाऊ, बेलिंग मशीन, क्रॉप रीपर, स्ट्रा रेक. रीपर कम बाइण्डर का अवश्य प्रयोग करें।
8. फसल अवशेष प्रबन्धन के अन्तर्गत इन-सीटू योजना में यन्त्रों को सुगमता से उपलब्ध कराने हेतु कस्टम हायरिंग सेन्टर एवं फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किये गये हैं, वहाँ से किसान भाई किराये पर यन्त्र प्राप्त कर अपने खेत फसल अवशेष का प्रबन्धन कर सकते हैं।
“फसल अवशेष नही जलायें, फसल अवशेष का कम्पोस्ट बनायें।”
“मृदा स्वास्थ न गिरने पाये, सतत लाभ खेती से पाये।”
“पोषक तत्व धुआं बन जाये, तब कैसे खेती हो पाये।”
9. मा० उच्चतम न्यायालय तथा मा० राष्ट्रीय हरित अधिकरण के कड़े निर्देश हैं तथा सेटेलाइट के माध्यम से लगातार निगरानी हो रही है। अतः फसल अवशेष जलाने पर सेटेलाइट द्वारा संम्बन्धित खेत का विवरण रिकार्ड कर लिया जाएगा और आपको अनावश्यक कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा। अतः किसान भाई फसल अवशेष कदापि न जलाएँ, अपितु उसे मिट्टी में मिलाकर खाद के रुप में परिवर्तित करें।
“अवशेषों से खाद बनायें, मृदा का कार्बन अंश बढ़ायें।”
10. मा० उच्चतम न्यायालय एवं मा० राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा फसल अवशेष को खेतों में जलाना दण्डनीय घोषित है।
11. फसल अवशेष जलाने पर अर्थ दण्ड/पर्यारणीय वसूली का प्राविधान- 2 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों से रु0 2500/- का जुर्माना प्रति घटना। 2 से 05 एकड़ भूमि वाले किसानों से रु0 5000/का जुर्माना प्रति घटना। 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों से रु0 15000/- का जुर्माना प्रति घटना।






