ए के तिवारी पत्रकार
जौनपुर, 28 अक्टूबर। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का बढ़ता इस्तेमाल और उनके अनुपयोगी होने के बाद उचित निस्तारण की चुनौती पर्यावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। इसी को लेकर तिलकधारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जौनपुर के शिक्षक शिक्षा विभाग में ई-वेस्ट जागरूकता एवं जिम्मेदार निस्तारण पर संगोष्ठी आयोजित की गई। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के विशेष अभियान-6 (2026) के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम की थीम ‘I Am E-Waste Warrior’ रही। इसमें भावी शिक्षकों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।

संगोष्ठी में मुख्य वक्ता वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के डीन प्रोफेसर सुधांशु सिन्हा ने ई-वेस्ट के बढ़ते खतरे और उसके पर्यावरणीय प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन, कंप्यूटर, बैटरी, चार्जर सहित अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सामान्य कचरे में फेंकना पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ऐसे कचरे का उचित संग्रहण और सुरक्षित निस्तारण समय की आवश्यकता है। डॉ. राय साहब यादव ने कार्यक्रम की केंद्रीय थीम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ई-वेस्ट प्रबंधन के लिए व्यक्तिगत जागरूकता के साथ सामूहिक सहभागिता भी जरूरी है। इलेक्ट्रॉनिक कचरे को इधर-उधर फेंकने के बजाय निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से उसके संग्रहण और निस्तारण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
बीएड विद्यार्थियों ने रखे सुझाव
कार्यक्रम में बीएड के विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए ई-वेस्ट के संग्रहण, पुनर्चक्रण और सुरक्षित निस्तारण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक कचरे के प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उपयोगी सुझाव भी प्रस्तुत किए।
प्रोफेसर अजय कुमार दुबे ने शैक्षणिक संस्थानों में पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने के महत्व को रेखांकित किया।

संगोष्ठी में प्रोफेसर रीता सिंह, प्रोफेसर श्रद्धा सिंह, डॉ. अरविंद कुमार सिंह, डॉ. गीता सिंह और अंजू श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने ई-वेस्ट प्रबंधन को पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जिम्मेदारी और सतत विकास से जोड़ते हुए जनजागरूकता बढ़ाने पर बल दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रशांत कुमार पांडेय ने किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को शैक्षिक ज्ञान देने के साथ-साथ उन्हें सामाजिक और पर्यावरणीय दायित्वों के प्रति जागरूक बनाना भी है। अंत में डॉ. निधि सिंह ने अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

संगोष्ठी के माध्यम से ‘I Am E-Waste Warrior’ की भावना के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन को सामूहिक दायित्व के रूप में अपनाने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।




