माटीकला महोत्सव का भव्य शुभारंभ आज,लाइव कारखाना, पॉटरी पेंटिंग एवं दीपोत्सव होंगे प्रमुख आकर्षण
उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड द्वारा आयोजित सात दिवसीय आजमगढ़ माटीकला महोत्सव का शुभारंभ आज 02 नवम्बर 2026 को डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क, कलेक्ट्रेट के सामने, आजमगढ़ में किया जाएगा। महोत्सव का उद्घाटन विजय बहादुर पाठक, विधान परिषद सदस्य (एमएलसी), आजमगढ़ द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।
महोत्सव का उद्देश्य पारंपरिक माटीकला को प्रोत्साहन देने, स्थानीय शिल्पकारों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने तथा आमजन को मिट्टी के शिल्प एवं भारतीय सांस्कृतिक विरासत से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना है।
महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में ‘लाइव कारखाना’ विशेष रूप से उल्लेखनीय होगा। इसके अंतर्गत आगंतुकों को कुशल कारीगरों के सानिध्य में स्वयं चाक पर मिट्टी के बर्तन एवं अन्य कलात्मक वस्तुएँ बनाने का अवसर मिलेगा। इस पहल के माध्यम से लोग माटीकला की पारंपरिक तकनीक को करीब से समझने के साथ-साथ अपने हाथों से मिट्टी की कलाकृति तैयार करने का अनुभव भी प्राप्त कर सकेंगे।
इसी क्रम में ‘पॉटरी पेंटिंग कॉर्नर’ स्थापित किया जाएगा, जहाँ आगंतुक मिट्टी से निर्मित बर्तनों एवं कलाकृतियों पर अपनी कल्पनाशीलता के अनुरूप रंग भरकर उन्हें आकर्षक रूप प्रदान कर सकेंगे। यह गतिविधि विशेष रूप से बच्चों, युवाओं एवं कला प्रेमियों के लिए एक अनूठा रचनात्मक अनुभव होगी।
महोत्सव के अंतर्गत जनभागीदारी एवं सांस्कृतिक उत्सवधर्मिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 02 नवम्बर 2026 को आजमगढ़ नगर के तीन प्रमुख चौराहों पर भव्य ‘दीपोत्सव’ का आयोजन भी किया जाएगा। इस अवसर पर मिट्टी के दीपों से चौराहों को सजाकर स्वदेशी माटीकला, पारंपरिक शिल्प एवं दीपावली की सांस्कृतिक भावना को प्रदर्शित किया जाएगा।
दीपोत्सव के माध्यम से जनसामान्य को स्थानीय कुम्हारों एवं माटीकला शिल्पकारों द्वारा निर्मित मिट्टी के दीपों एवं अन्य उत्पादों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। यह आयोजन ‘लोकल फॉर वोकल’ एवं स्वदेशी की भावना को सशक्त करने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों की आजीविका एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी प्रोत्साहित करेगा।
माटीकला महोत्सव के माध्यम से जनपदवासियों से अपील है कि वे अधिकाधिक संख्या में सहभागिता कर इस आयोजन को सफल बनाएं तथा स्थानीय शिल्पकारों के उत्पादों को अपनाकर उनके हुनर एवं परिश्रम को सम्मान प्रदान करें।
आइए, माटीकला महोत्सव में पधारें, स्वयं मिट्टी से सृजन करें, अपनी कलाकृति को रंगों से सजाएँ और दीपोत्सव के माध्यम से स्वदेशी माटीकला की चमक को नई पहचान दें।





