प्रयागराज : 20 साल बाद CRPF जवान को बड़ी राहत! हाई कोर्ट ने बर्खास्तगी पलटी, मिलेगा 25% बकाया वेतन

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प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सीआरपीएफ के एक पूर्व आरक्षी को बड़ी राहत देते हुए उसकी सेवा समाप्ति का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि किशोरावस्था में दर्ज आपराधिक मामले को आधार बनाकर किसी व्यक्ति की वयस्क होने के बाद सरकारी नौकरी खत्म नहीं की जा सकती।मामला चंद्रेश्वर प्रसाद यादव से जुड़ा है, जो वर्ष 2003 में सीआरपीएफ में आरक्षी के पद पर भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के दौरान हुए चरित्र सत्यापन में उनके खिलाफ आजमगढ़ में वर्ष 2001 में दर्ज एक आपराधिक मामले की जानकारी सामने आई। मामला आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज था और सत्यापन फॉर्म में इसका उल्लेख नहीं किया गया था। इसी आधार पर अगस्त 2004 में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं।

नाबालिग उम्र में दर्ज केस बना नौकरी छूटने की वजह

याची की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जिस समय एफआईआर दर्ज हुई थी, उस समय वह नाबालिग था। इसी आधार पर दलील दी गई कि किशोरावस्था में दर्ज आपराधिक मामले का असर बाद में मिली सरकारी नौकरी पर नहीं पड़ना चाहिए।कोर्ट ने किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों और पूर्व न्यायिक फैसलों पर विचार करते हुए इस दलील को महत्वपूर्ण माना।

 

करीब 20 साल नौकरी से बाहर, अब मिलेगा 25% बकाया वेतन

याची की सेवा समाप्ति के बाद मामले में अपील और पुनरीक्षण भी खारिज हो चुके थे। इसके बाद उसने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और संबंधित अधिकारियों द्वारा किए गए निर्णय की प्रक्रिया की भी समीक्षा की।अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए सेवा समाप्ति का आदेश रद्द कर दिया। साथ ही, करीब दो दशक तक नौकरी से बाहर रहने की स्थिति को देखते हुए 25 प्रतिशत बकाया वेतन देने का भी निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी लिया सहारा

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के अवतार सिंह बनाम भारत संघ (2016) मामले में दिए दिशा-निर्देशों का भी उल्लेख किया। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार, आपराधिक मामले या उसके खुलासे से जुड़े मामलों में नियुक्ति रद्द करने से पहले संबंधित प्राधिकारी को मामले की पूरी परिस्थितियों पर विचार करना चाहिए।

फैसले का सार: अदालत ने माना कि किशोरावस्था में दर्ज आपराधिक मामले को वयस्क होने के बाद सरकारी सेवा के खिलाफ हमेशा के लिए हथियार नहीं बनाया जा सकता। इस फैसले से याची को लंबे समय बाद बड़ी कानूनी राहत मिली है।

Azamgarh News
Author: Azamgarh News

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