
जौनपुर। शहर की सड़कों और गलियों की मौजूदा तस्वीर इन दिनों आम शहरवासी की परेशानी को साफ बयां कर रही है। कहीं कीचड़ से भरे गड्ढे हैं, कहीं जलभराव ने रास्ता रोक रखा है, कहीं सड़क टूटकर उखड़ चुकी है तो कई स्थानों पर कूड़ा-कचरा सड़क तक फैला दिखाई दे रहा है।सुबह नहा-धोकर साफ कपड़ों में घर से ड्यूटी, दुकान या किसी जरूरी काम के लिए निकलने वाला व्यक्ति रास्ते में कीचड़ और जलभराव से बचता हुआ आगे बढ़ने को मजबूर है।
टूटी सड़क का असर सिर्फ सफर पर नहीं, जेब पर भी
बदहाल सड़कों और गड्ढों का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है। लगातार टूटे-फूटे रास्तों से गुजरने वाले बाइक चालकों और ई-रिक्शा चालकों को वाहनों के रखरखाव और मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
गड्ढों और उबड़-खाबड़ रास्तों के कारण वाहनों के टायर, सस्पेंशन और अन्य हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। रोज इन मार्गों से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए यह समस्या धीरे-धीरे सड़क की परेशानी से बढ़कर जेब पर पड़ने वाला बोझ बनती जा रही है।
स्कूली बच्चों और बुजुर्गों की परेशानी सबसे ज्यादा
शहर की खराब गलियों और जलभराव वाले रास्तों से स्कूली बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी उठानी पड़ रही है। बारिश और कीचड़ के बीच बच्चों के कपड़े खराब होने, फिसलने और गंदे पानी से होकर गुजरने की समस्या बनी रहती है।वहीं बुजुर्गों के लिए टूटी सड़क, गड्ढे और जलभराव और भी बड़ी चुनौती बन जाते हैं। पैदल चलने वालों को कई जगह सुरक्षित रास्ता तलाशकर आगे बढ़ना पड़ता है।
सवाल यह है कि शहर की सड़कें आखिर किसके लिए हैं ..वाहनों के लिए, पैदल चलने वालों के लिए या फिर सिर्फ कागजों पर विकास दिखाने के लिए?

अहियापुर सबस्टेशन मार्ग पर स्टेशन जाने वाले यात्रियों की भी मुश्किल
अहियापुर सबस्टेशन मार्ग से स्टेशन की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को भी रास्ते की स्थिति के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे स्टेशन शहर और आसपास के लोगों के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में स्टेशन तक पहुंचने वाले मार्ग की खराब स्थिति का सीधा असर यात्रियों, उनके सामान के साथ आने-जाने वाले परिवारों और रोजाना सफर करने वालों पर पड़ता है।
ट्रेन पकड़ने की जल्दी में निकलने वाले यात्रियों के सामने रास्ते की स्थिति एक अतिरिक्त परेशानी बन जाती है।स्टेशन तक पहुंचने के लिए टिकट जरूरी है, लेकिन क्या सुगम रास्ता भी उतना ही जरूरी नहीं?

भंडारी से पंचहटिया तक—कई इलाकों में एक जैसी कहानी
भंडारी, इशापुर, डॉ. माधुरी चौरसिया मार्ग, सुतहट्टी, शकरमंडी, चितरसारी, मानिक चौक, रासमंडल, मियापुर, वाजिदपुर उत्तरी एवं दक्षिणी, कचहरी मार्ग, वन विहार मार्ग, विशेषरपुर, पंचहटिया, मुल्ला टोला की आसपास की लिंक गलियां, सुंदर नगर कॉलोनी, परमानतपुर सहित शहर के विभिन्न हिस्सों में सड़क, जलभराव, कीचड़ और सफाई से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं।
कहीं कीचड़, कहीं गड्ढा, कहीं कचरा और कहीं टूटी सड़क—शहरवासी आखिर किस रास्ते से निकलें?
सफाई व्यवस्था का सवाल भी सड़क पर खड़ा है
कई स्थानों पर जलभराव और कीचड़ के साथ कूड़ा-कचरा भी सड़क किनारे अथवा रास्ते पर दिखाई देता है। इससे न केवल आवागमन प्रभावित होता है, बल्कि लंबे समय तक गंदगी और गंदे पानी के जमा रहने से स्वच्छता को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।
यह किसी एक मोहल्ले की समस्या नहीं है। यह शहर की सड़क, सफाई और जलनिकासी जैसी मूलभूत नागरिक सुविधाओं से जुड़ा सवाल है।
शहर निवासी अमित तिवारी ने कहा कि बनी हुई चीज समय के साथ खराब हो सकती है। ऐसी स्थिति में सवाल खड़ा करने से ज्यादा जरूरी है कि उसे जल्द से जल्द ठीक कराया जाए। लेकिन शहर में मूलभूत समस्याओं का बढ़ता बोझ अब आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।उन्होंने जिला प्रशासन और नगर पालिका परिषद से संयुक्त रूप से अभियान चलाकर सफाई, जलनिकासी, सड़क मरम्मत और कूड़ा निस्तारण की समस्याओं का समाधान कराने की मांग की।
अब सवाल सीधा है—जौनपुर को ‘खास मौकों’ पर चमकता शहर चाहिए या हर दिन रहने लायक शहर?
शहरवासियों को भाषण नहीं, चलने लायक सड़क चाहिए। आश्वासन नहीं, जलभराव से राहत चाहिए।कागजों पर सफाई नहीं, सड़क पर सफाई चाहिए और ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें स्कूली बच्चों को कीचड़ से, बुजुर्गों को गड्ढों से, ई-रिक्शा चालकों को बढ़ते मरम्मत खर्च से और यात्रियों को स्टेशन पहुंचने की परेशानी से राहत मिल सके।
मौके की तस्वीरें और वीडियो शहर की मौजूदा स्थिति को खुद बयां कर रहे हैं। अब देखना यह है कि इन तस्वीरों के बाद जिम्मेदार विभाग भी जमीन पर उतरकर कार्रवाई करते हैं या जौनपुर की जनता को अभी और कीचड़, गड्ढों और बदहाल रास्तों के बीच सफर करना पड़ेगा।






