लेगा जमाना खून के एक-एक बूंद का बदला

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लेगा जमाना खून के एक-एक बूंद का बदला

रिपोर्टर अजय कुमार
गाजीपुर।साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में ‘चेतना प्रवाह’ कार्यक्रम के अंतर्गत महारानी लक्ष्मीबाई बालिका इण्टर कॉलेज गाजीपुर की पूर्व प्रधानाचार्या डॉ. शकुंतला राय के स्टेशन रोड स्थित आवास पर एक काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री संजय कुमार पाण्डेय के सुमधुर सरस्वती वंदना से हुआ।
मनोज यादव बेफिक्र ने अपनी ये पंक्तियाँ ‘ मेरी चीख बातों को समझना ।मेरे रुदन को हंसी में बदलना। मेरे लिए खुद कांटों पर चलना। कहीं जिक्र जब इसकी की जाती है । मां !तेरी याद बहुत आती है’ सुनाकर श्रोताओं की अतीव प्रशंसा अर्जित की। युवा कवि गोपाल गौरव ने अपनी प्रसिद्ध गजल ‘यह मुश्विरा है फकत तुम ना राम-राम करो। लगी है प्यास तो पानी का इंतजाम करो।।’ सुनाकर लोगों को सोचने पर मजबूर किया ।ओज के कवि दिनेश चंद्र शर्मा ने अपनी कविता ‘ लेगा जमाना खून के एक-एक बूंद का बदला । कातिल को कत्लेआम से थकने तो दीजिए।।’ भजन गायक और कवि अभिमन्यु सिंह यादव ने ‘दिल की पाजेब में यह छनन -छनन है जब तक ।हम भी गाएंगे गजल कहने का फन है जब तक ‘ सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुपरिचित शायर और कवि कुमार नागेश ने अपने मखमली आवाज में अपनी यह गजल प्रस्तुत की ‘ऐ मेरे दिल तुम जी कभी मुख्तसर आराम कर। अपने हिस्से में कभी इक मयकदे की शाम कर।’ हास्य और व्यंग्य के कवि आशुतोष श्रीवास्तव ने चुनाव पर व्यंग्य करते हुए सुनाया ‘ अबकि चुनाव में गिद्ध और शेरों ने साथ ही भाग्य आजमाया। शेरों से गिद्धों ने बाजी मार ली उनका क्षेत्र जो ठहरा।’ डॉ. संतोष कुमार तिवारी ने अपनी कविता ‘बूढ़ी दादी’ की इन पंक्तियों को सुना कर श्रोताओं को रससिक्त कर दिया ‘कोने बैठी, बूढी दादी। देख रही ,पोते के नखरे। कान न सुनता पैर न मुड़ता। बाकी बचे न मुंह में दांत। ऐनक से झांके वे दिन में। तारे गिनती सारी रात’ साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने अपनी कविता की पंक्ति ‘आगे बढ़ते उत्साही को ,कब रोक सकी दुर्गम राहें। मंजिल खुद उसे बुलाती है फैला करके दोनों बाहें’ सुनाकर श्रोताओं की ढेर सारी वाहवाही लूटी।संजय पाण्डेय ने अपनी हास्य पैरोडी ‘भंडारा’ को सुना कर लोगों को हंसने पर मजबूर किया’ थोड़ा भी ना शर्मा, भरपेट यहां खाओ। तुम जाते ही रहते हो जब तक ना कोई टोके ,अब रहने भी दो तुम थोड़ा भी शरमा इस अवसर पर साहित्य चेतना समाज के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी, केंद्रीय विद्यालय की सेवानिवृत्त हिंदी शिक्षिका विनीता राय,श्रीमती अर्चना राय, ज्योति उपाध्याय, शैल्वी राय ,मृगेन्द्र कुमार राय आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही ।अपने अध्यक्षीय
उद्बोधन में डाॅ.शकुंतला राय ने संस्था के उद्देश्य एवं गतिविधियों की भूरि -भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से साहित्यिक वातावरण का सृजन होता है और नवोदित रचनाकारों को मंच मिलता है।उन्होंने योगिराज पवहारी बाबा के जीवन दर्शन पर केन्द्रित अपनी पुस्तक सभी को भेंट की।संचालन डी.ए.वी.इण्टर काॅलेज के हिन्दी शिक्षक डाॅ.संतोष कुमार तिवारी एवं धन्यवाद ज्ञापन संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने किया।

Dheeraj Pathak
Author: Dheeraj Pathak

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