चार साल बाद भी नहीं मिला न्याय, बेटे का हाथ हुआ दिव्यांग; पीड़ित ने मानवाधिकार आयोग से लगाई गुहार

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चार साल बाद भी नहीं मिला न्याय, बेटे का हाथ हुआ दिव्यांग; पीड़ित ने मानवाधिकार आयोग से लगाई गुहार

बलरामपुर। थाना क्षेत्र के गोविंदपुर गांव निवासी विरेंद्र मौर्य अपने बेटे के इलाज में कथित लापरवाही को लेकर चार वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि अतरौलिया स्थित निजी अस्पताल जय गुरुदेव अस्पताल में गलत उपचार किए जाने से उनके पुत्र का दायां हाथ स्थायी रूप से प्रभावित हो गया और वह दिव्यांग हो गया।
पीड़ित के अनुसार चार वर्ष पूर्व उनके पुत्र का हाथ फ्रैक्चर हो गया था, जिसके बाद उसे अतरौलिया के निजी अस्पताल जय गुरुदेव अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा गलत उपचार किए जाने से स्थिति गंभीर हो गई। बाद में बच्चे का इलाज पीजीआई लखनऊ में कराया गया, जहां उसकी चार बार सर्जरी हुई, लेकिन हाथ पूरी तरह ठीक नहीं हो सका।
विरेंद्र मौर्य का कहना है कि वह कार्रवाई की मांग को लेकर लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी, जिलाधिकारी तथा मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई थी। स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम ने पहले अस्पताल की जांच कर उसे सील कर दिया था, लेकिन कुछ समय बाद अस्पताल का संचालन फिर शुरू हो गया। इसके बाद पीड़ित ने उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग से भी गुहार लगाई।
सोमवार को पीड़ित मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय पहुंचा और मामले में कार्रवाई की मांग की। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एनआर वर्मा ने बताया कि मानवाधिकार आयोग को भेजी गई शिकायत के क्रम में जिलाधिकारी के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच समिति गठित की गई थी। समिति में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अब्दुल अजीज, डिप्टी सीएमओ एवं निजी चिकित्सा प्रतिष्ठान के नोडल अधिकारी डॉ. आलेंद्र कुमार तथा जिला प्रशासनिक अधिकारी दिलीप प्रदीप सिंह को शामिल किया गया था।
सीएमओ ने बताया कि जांच समिति ने विस्तृत जांच कर अपनी आख्या प्रस्तुत कर दी है। जांच के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों, संबंधित स्थल की वर्तमान स्थिति, पंजीकरण अभिलेखों तथा उपलब्ध चिकित्सकीय तथ्यों का परीक्षण किया गया। स्थलीय निरीक्षण में अतरौलिया बाजार क्षेत्र में जय गुरुदेव हड्डी अस्पताल नाम से कोई चिकित्सालय संचालित नहीं पाया गया। उन्होंने बताया कि जिस प्रतिष्ठान के संबंध में शिकायत की गई थी, उसे स्वास्थ्य विभाग पूर्व में नियमानुसार सील कर चुका है।
निरीक्षण के दौरान उक्त स्थल पर अनामी अर्थो क्लीनिक संचालित पाया गया, जिसका सामान्य ओपीडी कार्य के लिए पंजीकरण है। जांच के समय क्लीनिक पर एमबीबीएस चिकित्सक डॉ. सत्येंद्र कुमार उपस्थित मिले। सीएमओ ने कहा कि उपचार में लापरवाही के आरोपों की अलग से जांच कराई जा रही है। यदि किसी स्तर पर चिकित्सकीय मानकों के उल्लंघन, अनियमितता अथवा दोष की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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