

सिद्धेश्वरी धाम पर सैकड़ों साल से खड़ा है बरगद, पीपल का पेड़।
लालगंज (आजमगढ़) सिधौना सिद्धेश्वरी मंदिर के परिसर में स्थित अनेक वृक्ष है जो वहां के पर्यावरण को संतुलित रखते हैं इन वृक्षों में ब्रह्मा, विष्णु, महेश करते हैं वास। वातावरण को शीतलता प्रदान करने में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं पर कुछ ऐसे पेड़ भी हैं जो 100 साल पुराने हैं। उक्त धाम पर बरगद और पीपल का वृक्ष है जो जटाधारी तपस्वी की तरह 100 साल से खड़ा है। पौराणिक मान्यताएं हैं कि बरगद के वृक्षों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश वास करते हैं। देवों के देव महादेव बरगद के पेड़ के ऊपरी हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं उस पेड़ के जड़ों में ब्रह्मा का निवास होता है। इस प्रकार पीपल के पेड़ की जड़ में विष्णु जी, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में भगवान हरि और फलों में सभी देवता निवास करते हैं। पीपल और बरगद की सबसे अधिक ठंड प्रदान करने बाला वृक्ष माना जाता है। यह दोनों पेड़ पर्यावरण के लिए संजीवनी का काम करते हैं। दोनों पेड़ हवा से कार्बन डाई ऑक्साइड ग्रहण कर हम लोगों को आक्सीजन देते हैं। पर्यावरण संरक्षण में इन सभी वृक्षों का महत्वपूर्ण स्थान है। प्रदूषण जनित स्थानों पर बरगद का पेड़ लगाने से यह प्रदूषण को कम करता है। बरगद वृक्ष की हर शाखाएं, पत्तियां, फल और फूल औषधीय गुणों से परिपूर्ण होते हैं। विभिन्न रोगों के उपचार में यह पेड़ काफी कारगर साबित होते हैं। आज पर्यावरण को संतुलन बनाए रखने में इनकी सबसे अधिक आवश्यकता है, वैसे इन सभी वृक्षों की संख्या कम होती जा रही है जिसका परिणाम आज हम सभी प्रत्यक्ष रूप से देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह पेड़ काफी पुराना है और इसे हिन्दू। धर्म के अनुसार देव के रूप में पूजा जाता है। इस पेड़ से हमें शुद्ध वातावरण और पर्यावरण मिलता है। जिससे हम लोग खुले में रह पाते हैं। ये सभी वृक्ष वहां के वातावरण को शुद्ध करते हैं व मंदिर के चारों तरफ लगे हुए पेड़ मंदिर के आकर्षण को बढ़ा देते हैं प्रकृति का सौंदर्य देखने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है।





