पत्रकार ए के तिवारी
जौनपुर, 22 अक्टूबर। शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सोचने, समझने और वास्तविक परिस्थितियों में समस्याओं का समाधान करने की क्षमता विकसित करना भी है। इसी दृष्टिकोण को केंद्र में रखते हुए तिलकधारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जौनपुर के शिक्षक शिक्षा विभाग में गुरुवार को अनुभवात्मक अधिगम विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. बी.आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ऋषभ मिश्रा ने अनुभव आधारित शिक्षण की अवधारणा और उसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अनुभव, चिंतन और प्रयोग से मजबूत होती है सीखने की प्रक्रिया
डॉ. मिश्रा ने बताया कि अनुभवात्मक अधिगम केवल किसी कार्य को करके सीख लेने तक सीमित नहीं है। यह अनुभव प्राप्त करने, उसका अवलोकन करने, चिंतन के माध्यम से निष्कर्ष निकालने और सीखी गई बातों को नई परिस्थितियों में लागू करने की सतत प्रक्रिया है। इस पद्धति में विद्यार्थी स्वयं अपने अनुभवों का विश्लेषण करते हैं और ज्ञान को वास्तविक जीवन की समस्याओं से जोड़ना सीखते हैं।
उन्होंने प्रत्यक्ष अनुभव, चिंतनपरक अवलोकन, अवधारणा निर्माण, सक्रिय प्रयोग और सामाजिक अंतःक्रिया को प्रभावी अधिगम के प्रमुख आयाम बताया। साथ ही अनुभवात्मक अधिगम चक्र की चर्चा करते हुए समझाया कि अनुभव से प्राप्त सीख को व्यावहारिक प्रयोग से जोड़ना शिक्षा को अधिक उपयोगी और सार्थक बनाता है।

शिक्षा में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बी.एड. विभाग के प्रोफेसर अजय कुमार दुबे ने शिक्षक शिक्षा में अनुभव आधारित शिक्षण पद्धतियों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को केवल सूचनाएं उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उन्हें प्रश्न पूछने, विश्लेषण करने, अपने विचार विकसित करने और स्वतंत्र रूप से निष्कर्ष निकालने के अवसर मिलना भी आवश्यक है।वहीं, सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रशान्त कुमार पाण्डेय ने अनुभवात्मक अधिगम को समकालीन शिक्षक शिक्षा का महत्वपूर्ण आयाम बताया। उन्होंने शिक्षक-प्रशिक्षण में सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता रेखांकित की।

शिक्षक शिक्षा विभाग के प्राध्यापकों और विद्यार्थियों की रही सहभागिता
कार्यक्रम का संचालन शोध छात्र आनन्द उपाध्याय ने किया। व्याख्यान में शिक्षक शिक्षा विभाग के प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
इस व्याख्यान के माध्यम से अनुभव आधारित शिक्षण की अवधारणा, उसके सैद्धांतिक पक्ष और शिक्षा में उसके व्यावहारिक महत्व पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश रहा कि जब शिक्षा में अनुभव, चिंतन और प्रयोग को उचित स्थान मिलता है, तब विद्यार्थियों के लिए ज्ञान को समझना और उसे जीवन में उपयोग करना अधिक प्रभावी हो सकता है।




