जिलाधिकारी ने कान्हा गौशाला का किया स्थलीय निरीक्षण, गोवंशों के संरक्षण एवं व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के दिए निर्देश
संवाददाता आजमगढ़ अतीक अहमद आजमगढ़ न्यूज़
गोवंशों की नियमित स्वास्थ्य जांच, नर-मादा एवं बीमार पशुओं को अलग-अलग रखने के निर्देश
गौशाला में एक माह की आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त भूसा उपलब्ध रखने का निर्देश जिलाधिकारी
योगी सरकार के नेतृत्व में निराश्रित एवं बेसहारा गोवंशों के संरक्षण, भरण-पोषण एवं संवर्धन के लिए प्रदेश में व्यापक अभियान संचालित किया जा रहा है।गो-संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तिकरण, हरित ऊर्जा एवं रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार द्वारा जनपद में संचालित गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं का लगातार स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
इसी क्रम में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने ग्राम मुजफ्फरपुर स्थित नगर पालिका परिषद आजमगढ़ द्वारा संचालित कान्हा गौशाला एवं बेसहारा गौ आश्रय स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गौशाला में गोवंशों के संरक्षण, चारा-भूसा, साफ-सफाई, स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
जिलाधिकारी ने सबसे पहले गोवंश उपस्थिति पंजिका का अवलोकन किया। पंजिका के अनुसार गौशाला में कुल 264 गोवंश संरक्षित पाए गए। उन्होंने गोवंशों की संख्या एवं पंजिका में दर्ज विवरण का मिलान करते हुए आवश्यक जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने खर्चा रजिस्टर का भी अवलोकन किया तथा गौशाला में उपलब्ध संसाधनों एवं उनके उपयोग की जानकारी संबंधित अधिकारियों से प्राप्त की।
गौशाला परिसर के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने साफ-सफाई की व्यवस्था को और बेहतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गोवंशों के स्वस्थ एवं सुरक्षित रहने के लिए गौशाला परिसर में नियमित साफ-सफाई, जल निकासी एवं स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद आजमगढ़ को गौशाला परिसर में खाली स्थान पर खड़ंजा लगवाने तथा किनारे पर नाली का निर्माण कराने के निर्देश दिए, जिससे जलभराव की समस्या न हो और परिसर को व्यवस्थित रखा जा सके।
इसके पश्चात जिलाधिकारी ने भूसा घर का निरीक्षण किया। भूसे की गुणवत्ता अच्छी पाई गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि गौशाला में गोवंशों के लिए पर्याप्त मात्रा में भूसा उपलब्ध रहे तथा कम से कम एक माह तक पशुओं को खिलाने के लिए अतिरिक्त भूसा हमेशा सुरक्षित रखा जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में चारे की कमी न होने पाए। उन्होंने भूसे के सुरक्षित एवं व्यवस्थित भंडारण पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गोवंशों को गुड़ खिलाकर पशु सेवा की तथा उनके संरक्षण एवं बेहतर देखभाल के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि निराश्रित गोवंशों की देखभाल केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता से जुड़ा कार्य भी है। गौशाला में संरक्षित प्रत्येक गोवंश को पर्याप्त चारा, स्वच्छ पानी, सुरक्षित आश्रय एवं आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि गौशाला में संरक्षित गोवंशों का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए तथा बीमार पशुओं की पहचान होने पर तत्काल उपचार की व्यवस्था की जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि नर, मादा एवं बीमार गोवंशों को अलग-अलग रखा जाए, ताकि पशुओं के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को बेहतर ढंग से सुनिश्चित किया जा सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि गोवंश संरक्षण के साथ-साथ गौशालाओं की व्यवस्थाओं को मानवीय एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बेहतर बनाना आवश्यक है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि गौशाला में संरक्षित गोवंशों की देखभाल में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए तथा शासन की मंशा के अनुरूप सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
उन्होंने कहा कि गोवंश संरक्षण के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों एवं ग्रामीणों को लाभान्वित करने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जाने चाहिए। गौशालाओं को सुव्यवस्थित एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाए।





