वैश्विक मंच पर चमके चंदौली के दो होनहार चिकित्सक डॉ. अभिमन्यु पांडेय और डॉ. रिद्धि पांडेय ने रचा इतिहास

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वैश्विक मंच पर चमके चंदौली के दो होनहार चिकित्सक डॉ. अभिमन्यु पांडेय और डॉ. रिद्धि पांडेय ने रचा इतिहास

डीडीयू नगर। विश्व होम्योपैथी दिवस, जो सैमुअल हैनीमैन के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। अवसर पर ब्रिटिश पार्लियामेंट के हाउस ऑफ लॉर्ड्स (चोलमॉन्डले कक्ष) में “होलिस्टिक वैज्ञानिक सम्मेलन” का भव्य आयोजन किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विश्वभर से 150 से अधिक होम्योपैथिक चिकित्सकों ने भाग लिया।
इस प्रतिष्ठित मंच पर डॉ. अभिमन्यु पांडेय को ऑटोइम्यून बीमारियों पर किए गए उनके शोध कार्य एवं केस प्रस्तुतीकरण के लिए सम्मानित किया गया। उनके प्रस्तुत केस में एक ऐसी महिला का उल्लेख रहा, जो वाराणसी निवासी 16 वर्षीय रोहिणी को गंभीर बीमारी गिलियन-बार्रे सिंड्रोम और पॉलीरेडिक्युलोपैथी विथ माइलोपैथी के कारण अचानक चलने-फिरने में असमर्थता और असहनीय दर्द का सामना करना पड़ा। बड़े अस्पताल में कई दिनों तक आई सी यू में भर्ती रहने के बाद भी उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई। जरा सा हिलना डुलना तक दुश्वार था। महंगे इलाज के बाद भी कोई राहत नहीं मिली, साथ ही लगातार उल्टियाँ भी नहीं रूक रही थीं। इसी दौरान किसी मजार के बाबा ने डॉक्टर. पाण्डेय का पता बताया, जिसके बाद परिजनों ने डॉक्टर से मिलकर परामर्श लिया और होम्योपैथी उपचार शुरू कराया। केवल तीन खुराक में उल्टियाँ बंद हो गईं और धीरे-धीरे रोहिणी के स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। कुछ महीनों के इलाज के बाद रोहिणी पूरी तरह स्वस्थ हो गईं। आज उनका विवाह हो चुका है और वे सफलतापूर्वक माँ भी बन चुकी हैं। यह मामला होम्योपैथी के प्रभावी परिणाम का उदाहरण माना जा रहा है। बताते चले कि यह सम्मान ब्रिटिश संसद की सदस्य शिवानी राजा एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में प्रदान किया गया। सम्मेलन में ब्रिटिश पार्लियामेंट की सदस्य शिवानी राजा, लॉर्ड रावल, क्रिकेटर लॉर्ड एलिस्टर कुक, पूर्व क्रिकेटर डेविड गावर, स्टुअर्ट ब्रॉड तथा जोनाथन ट्रॉट सहित कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। जिस होम्योपैथी को कभी कम आंका जाता था, आज वही चिकित्सा पद्धति वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रही है। डॉ. अभिमन्यु पांडेय की यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि उनके निरंतर परिश्रम, समर्पण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का परिणाम है। इसी कड़ी में, उनकी पत्नी एवं प्रतिभाशाली होम्योपैथ चिकित्सक डॉ. रिद्धि पांडेय ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में “इंफर्टिलिटी एवं महिला विकार” विषय पर अपना विशेष केस प्रस्तुत किया। यह अवसर उन्हें उनके वर्षों की कड़ी मेहनत, समर्पण और विशेषज्ञता के आधार पर प्राप्त हुआ। डॉ. रिद्धि पांडेय का यह प्रस्तुतीकरण महिलाओं से जुड़ी जटिल बीमारियों के समाधान एवं जागरूकता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके इस कार्य से न केवल चंदौली, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन हुआ है। इस अवसर पर डॉ. रिद्धि पांडेय को लंदन में प्रधानमंत्री के मुख्य सचिव माइल्स स्टेसी द्वारा सम्मानित भी किया गया, जो उनके कार्य की वैश्विक सराहना का प्रतीक है। डॉ. अभिमन्यु पांडेय ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। यह उन्हें और अधिक मेहनत करने, होम्योपैथी को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ आगे बढ़ाने तथा जटिल एवं असाध्य रोगों के उपचार में योगदान देने की प्रेरणा देता है। उन्होंने मीडिया से प्रेस वार्ता में अपील करते हुए कहा कि होम्योपैथी को मुख्यधारा की चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करने में सहयोग करें, ताकि एक स्वस्थ और सशक्त भारत एवं विश्व का निर्माण किया जा सके।

Dheeraj Pathak
Author: Dheeraj Pathak

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