जौनपुर में गूंजा लोकमंगल का संदेश: रामचरितमानस को बताया मानवता, संस्कार और सामाजिक चेतना का अमर ग्रंथ #AZAMGARHNEWS

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ए के तिवारी

जौनपुर। मानस अमृत परिवार के तत्वावधान में रामेश्वरम सदन, रासमंडल में आयोजित ‘मानस अमृत लोकमंगल उत्सव’ श्रद्धा, ज्ञान और सांस्कृतिक चेतना का प्रेरक संगम बन गया। दीप प्रज्ज्वलन और श्रीरामचरितमानस के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद विद्वानों ने रामचरितमानस की लोककल्याणकारी शिक्षाओं और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से अपने विचार रखे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं पूर्व प्राचार्य एवं मानस अमृत पत्रिका की संरक्षक प्रो. डॉ. माधुरी सिंह ने कहा कि श्रीरामचरितमानस केवल आस्था का ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों, सेवा, करुणा और लोककल्याण की अमूल्य धरोहर है, जिसके आदर्श आज भी समाज को दिशा देते हैं।

 

पूर्व विभागाध्यक्ष, संस्कृत विभाग, टी.डी. पी.जी. कॉलेज, डॉ. निरूपा सिंह ने रामचरितमानस को भारतीय ज्ञान परंपरा का उज्ज्वल आधार बताते हुए कहा कि यह ग्रंथ सत्य, मर्यादा, कर्तव्य और संस्कारों का संदेश जन-जन तक पहुंचाता है।

पूर्व विभागाध्यक्ष, दर्शनशास्त्र विभाग, प्रो. डॉ. दलसिंगार ने अपने अनुभवों और काव्यमय अभिव्यक्ति के माध्यम से संवेदना, समरसता और मानवता को जीवन का वास्तविक उद्देश्य बताया। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित श्रोताओं को भावुक कर दिया।

 

प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. (डॉ.) अजय कुमार दुबे ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी है। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस इन मूल्यों की सशक्त प्रेरणा प्रदान करता है।

पूर्व जिला न्यायाधीश बी.एन. सिंह ने कहा कि न्याय, सत्य, मर्यादा और नैतिकता ही आदर्श समाज की नींव हैं तथा भगवान श्रीराम का जीवन प्रत्येक नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत है।

प्रेरक वक्ता राकेश मिश्रा ने लोकमंगल, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक जागरण और मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना की आवश्यकता पर बल देते हुए युवाओं से भारतीय संस्कृति, साहित्य और प्रकृति संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

 

शिक्षिका एवं काव्य साधिका सुमति श्रीवास्तव ने अपनी काव्य प्रस्तुति से कार्यक्रम को भक्तिमय बना दिया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस जीवन में प्रेम, करुणा, सेवा और सद्भाव की भावना को मजबूत करता है।

बाल वक्ता कार्वी श्रीवास्तव ने आत्मविश्वासपूर्ण संबोधन में बच्चों को संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनकी प्रभावशाली प्रस्तुति को उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।

 

समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों ने लोकमंगल, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक चेतना और मानवीय मूल्यों के संवर्धन का सामूहिक संकल्प लिया। बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद्, समाजसेवी, बुद्धिजीवी, महिलाएं, युवा और बाल प्रतिभाएं कार्यक्रम में शामिल हुईं। समापन पर डॉ. विमला सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भारतीय संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण के लिए निरंतर सजग रहने का आह्वान किया।

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Author: Azamgarh News

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