निपुण भारत की समीक्षा में डीएम के कड़े तेवर—एमडीएम की गुणवत्ता से समझौता नहीं, बच्चों की प्रतिभा निखारने पर जोर
जौनपुर, 31 अगस्त।
सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का माहौल और बेहतर बनाने के लिए जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन ने सोमवार को बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर कई अहम निर्देश दिए। कलेक्ट्रेट स्थित मीटिंग हॉल में हुई निपुण भारत मिशन एवं जिला टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता से लेकर मिड-डे मील और शिक्षकों के मोबाइल इस्तेमाल तक कई मुद्दों पर डीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए।
बैठक में बच्चों को डीबीटी के जरिए मिलने वाली 1200 रुपये की धनराशि, मध्याह्न भोजन, विद्यालय कायाकल्प के 19 मानक, दिव्यांग बच्चों के लिए सुविधाएं, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में निर्माण एवं शैक्षिक व्यवस्था तथा अभिभावक-शिक्षक बैठकों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।

एमडीएम की थाली में गुणवत्ता से समझौता नहीं
जिलाधिकारी ने मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों को सख्त हिदायत दी। उन्होंने साफ किया कि बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही स्कूलों में हो रहे शैक्षिक प्रयोगों को प्रोत्साहित करने और अभिभावक-शिक्षक बैठकों को महज औपचारिकता न बनाकर प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
फाइटर जेट ने खींचा डीएम का ध्यान, छात्र की प्रतिभा को मिला सम्मान
बैठक में उस समय माहौल खासा रोचक हो गया, जब मुफ्तीगंज ब्लॉक के एक छात्र ने खुद तैयार किया हुआ फाइटर जेट का मॉडल प्रस्तुत किया और उसकी उड़ान का प्रदर्शन किया।
छात्र की वैज्ञानिक सोच, तकनीकी समझ और रचनात्मकता से प्रभावित जिलाधिकारी ने उसकी प्रतिभा की सराहना की और उसे सम्मानित किया। डीएम ने विद्यालयों में बच्चों की नई सोच, प्रयोग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को लगातार प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई।

मड़ियाहूं के स्कूलों के नवाचार भी बने चर्चा का विषय
मड़ियाहूं ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी ने चित्रों और बिंदुवार प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ब्लॉक में किए जा रहे शैक्षिक नवाचारों की जानकारी दी। इनमें कर्सिव राइटिंग, अभिभावक गोष्ठियां, साइकिल वितरण, पेंटिंग, बागवानी समेत विभिन्न गतिविधियों को शामिल किया गया।
कक्षा में मोबाइल से दूरी, पढ़ाई पर पूरा फोकस
शिक्षकों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर जिलाधिकारी ने विशेष सख्ती दिखाई। उन्होंने निर्देश दिया कि कक्षा शिक्षण के दौरान शिक्षकों के मोबाइल फोन प्रधानाध्यापक के पास जमा कराए जाएं।
डीएम का उद्देश्य स्पष्ट है—कक्षा में शिक्षक का ध्यान मोबाइल पर नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, उनकी समझ और शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने पर होना चाहिए।

पढ़ाई के साथ संस्कार और हुनर भी जरूरी
जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यालय केवल किताबी शिक्षा तक सीमित नहीं होने चाहिए। बच्चों के भौतिक, व्यवहारिक, नैतिक और सांस्कृतिक विकास पर भी बराबर ध्यान दिया जाए। खेलकूद, पाठ-सहगामी गतिविधियों, रचनात्मक कार्यों, नई खोज और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ध्रुव खड़िया, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, डायट प्राचार्य, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सभी खंड शिक्षा अधिकारी, जिला समन्वयक, एसआरजी समेत बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे।





