किसी ने थामा बांसुरी वाला कृष्ण का रूप, तो कोई बनी राधा; संस्कृति और संस्कारों की झलक से सजा सिद्धार्थ उपवन
ए के तिवारी
जौनपुर। नन्हे कदम, मासूम चेहरे और राधा-कृष्ण के मनमोहक स्वरूप… सिद्धार्थ उपवन रविवार को उस समय भक्ति और भारतीय संस्कृति के रंग में रंग गया, जब संस्कार भारती जौनपुर की ओर से 37वें बाल गोकुलम श्री राधाकृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में बच्चों ने राधा, कृष्ण और लल्ला के विभिन्न स्वरूप धारण कर अपनी प्रतिभा के साथ भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों की सुंदर प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानाचार्य एवं कार्यक्रम अध्यक्ष सत्यप्रकाश सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष मनोरमा मौर्या, विशिष्ट अतिथि विनीत सेठ, उद्योगपति मनोज अग्रहरि, संस्था के संरक्षक रविंद्र नाथ, अध्यक्ष डॉ. ज्योति दास, काशी प्रांत महामंत्री सुजीत श्रीवास्तव और महामंत्री अमित गुप्ता ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। मां सरस्वती, भगवान नटराज और श्री राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर पूजन किया गया। इसके बाद संस्था के सदस्यों ने ध्येय गीत प्रस्तुत किया।
लल्ला से शुरू हुआ मुकाबला, राधा-कृष्ण के रूपों ने बांधा समां
प्रतियोगिता की शुरुआत लल्ला वर्ग से हुई। इसके बाद श्री राधा और श्री कृष्ण वर्ग में बच्चों ने आकर्षक वेशभूषा में अपनी प्रस्तुतियां दीं। नन्हे प्रतिभागियों के मनमोहक रूप और आत्मविश्वास ने वहां मौजूद अभिभावकों और दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत प्रजापति ने संस्कार भारती के स्थापना उद्देश्य और संस्था की सांस्कृतिक यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय कला, संस्कृति और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में संस्था लगातार कार्य कर रही है।
काशी प्रांत महामंत्री सुजीत श्रीवास्तव ने कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया। वहीं विनीत सेठ ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में बच्चों को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने वाले ऐसे आयोजन बेहद महत्वपूर्ण हैं।
उद्योगपति मनोज अग्रहरि ने आयोजन की सराहना करते हुए संस्था के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहयोग जारी रखने की बात कही। कार्यक्रम अध्यक्ष सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि बचपन से ही बच्चों को अपनी परंपराओं से जोड़ने वाले कार्यक्रम उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संस्था के संरक्षक एवं प्रथम अध्यक्ष डॉ. अरुण मिश्रा ने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि 37 वर्ष पहले लगाया गया संस्कार भारती का पौधा आज जिस रूप में फल-फूल रहा है, उसे देखकर प्रसन्नता होती है।

इन नन्हे कलाकारों ने मारी बाजी
लल्ला वर्ग
🥇 प्रथम — शिवाली श्रीवास्तव
🥈 द्वितीय — वंशिका आर्या
🥉 तृतीय — कृश
श्री राधा वर्ग
🥇 प्रथम — शिवांगी अग्रहरि
🥈 द्वितीय — दिव्यांशी सिंह
🥉 तृतीय — अनायसा जायसवाल
श्री कृष्ण वर्ग
🥇 प्रथम — देव अग्रहरि
🥈 द्वितीय — मनन सेठ
🥉 तृतीय — कविश उपाध्याय
प्रतियोगिता के बाद लल्ला, श्री राधा और श्री कृष्ण के सभी स्वरूपों की सामूहिक आरती की गई। नगर पालिका अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि मनोरमा मौर्या ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर उनका उत्साह बढ़ाया।
निर्णायक मंडल में शामिल सुषमा गुप्ता, अर्चना सिंह और कलाविद नवीन विश्वकर्मा को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

व्यवस्था से लेकर संचालन तक जुटे रहे कार्यकर्ता
कार्यक्रम का संचालन संस्था के प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं जिला उपाध्यक्ष ऋषि श्रीवास्तव ने किया। महामंत्री अमित गुप्ता ने अतिथियों, अभिभावकों और संस्था के सदस्यों के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम संयोजक अभिताश गुप्ता एवं दीपक श्रीवास्तव ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वालों का धन्यवाद किया।
कार्यक्रम में संस्था के पदाधिकारी, सदस्य, अभिभावक और बड़ी संख्या में गणमान्यजन मौजूद रहे। अंत में सभी ने सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया।
नन्हे बच्चों के राधा-कृष्ण स्वरूपों से सजे इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं की जड़ें मजबूत करने की शुरुआत बचपन से ही की जाए तो संस्कारों की यह विरासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ सकती है।





