जौनपुर : 12 साल की लायबा के लिए 22वीं बार रक्तदान, शम्स तबरेज़ खान ने पेश की इंसानियत की मिसाल

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पत्रकार : ए के तिवारी

जौनपुर, 8 अक्टूबर 2026। अप्लास्टिक एनीमिया से जूझ रही 12 वर्षीय लायबा के इलाज में रक्त की लगातार जरूरत के बीच रक्तदाताओं की मुहिम उसके परिवार के लिए उम्मीद का सहारा बनी हुई है। इसी क्रम में अल-फलाह फाउंडेशन फ्री ब्लड डोनेट ग्रुप के बैनर तले शम्स तबरेज़ खान ने गुरुवार को अपना 22वां रक्तदान किया।

लायबा को चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार बार-बार रक्त की जरूरत पड़ती है। ऐसे में संस्था लगातार रक्तदाताओं की व्यवस्था कर उसके इलाज में सहयोग कर रही है। शम्स तबरेज़ खान का कहना है कि लायबा के लिए किया गया यह रक्तदान उनके लिए महज 22वीं बार रक्त देने का अवसर नहीं, बल्कि एक मासूम की जिंदगी की लड़ाई में अपना योगदान देने का प्रयास है।

उन्होंने संस्था के संस्थापक ज़ाकिर हुसैन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि रक्तदान की इस मुहिम को लगातार आगे बढ़ाने के पीछे उनकी सेवा भावना और समर्पण महत्वपूर्ण है। उनका उद्देश्य केवल जरूरत के वक्त रक्त उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि संकट से जूझ रहे मरीज और उसके परिवार को यह विश्वास दिलाना भी है कि समाज उनके साथ खड़ा है।

शम्स तबरेज़ खान ने संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष इस्माईल शेख सहित पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों के योगदान को भी सराहा। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से रक्तदान की यह सेवा जरूरतमंदों तक लगातार पहुंच रही है।

तैयब की सेवा भावना को किया सलाम

उन्होंने अल-फलाह फाउंडेशन से जुड़े मोहम्मद तैयब की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि अनीता ब्लड बैंक में सेवा के दौरान तैयब रक्तदाताओं के साथ आत्मीय व्यवहार करने के साथ उनकी सुविधा और आराम का भी ध्यान रखते हैं। 8 अक्टूबर को उन्हीं की देखरेख में उनका 22वां रक्तदान हुआ। शम्स ने कहा कि रक्तदान कराने के साथ रक्तदाता को सम्मान और भरोसा देना भी सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

DKMS से जुड़कर बढ़ाया सेवा का दायरा

रक्तदान के अलावा शम्स तबरेज़ खान ने DKMS के संभावित ब्लड स्टेम सेल डोनर के रूप में भी पंजीकरण कराया है। उनका कहना है कि भविष्य में जरूरतमंद मरीजों के लिए स्टेम सेल डोनेशन के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किया जाना चाहिए।

युवाओं से रक्तदान की अपील

उन्होंने स्वस्थ और पात्र लोगों से नियमित रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की। उनका कहना है कि रक्त किसी कारखाने में तैयार नहीं होता, बल्कि जरूरत के समय एक इंसान ही दूसरे इंसान के काम आता है।उन्होंने कहा कि लायबा जैसी मासूम बच्चियों की जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। लोगों को रक्तदान को मजबूरी नहीं, बल्कि मानवता की नियमित सेवा के रूप में अपनाना चाहिए। उन्होंने लोगों से लायबा के स्वास्थ्य के लिए दुआ करने और जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्तदान की मुहिम में सहभागी बनने की अपील की।

Azamgarh News
Author: Azamgarh News

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