नाना पाटेकर नहीं रहे: पर्दे पर गरजती आवाज और आंखों से अभिनय करने वाला कलाकार हमेशा के लिए खामोश

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मुंबई। भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा कलाकारों में शुमार अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर उन्हें गंभीर हृदयाघात आया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उनका निधन हो गया।

नाना पाटेकर का जाना सिर्फ बॉलीवुड के एक अभिनेता का चले जाना नहीं है, बल्कि भारतीय सिनेमा की उस अभिनय परंपरा का एक बड़ा अध्याय समाप्त होना है, जिसमें संवाद से ज्यादा आंखों की भाषा, आवाज की गहराई और चेहरे के भाव बोलते थे।

थिएटर से शुरू हुआ सफर, सिनेमा तक बना अलग मुकाम

महाराष्ट्र में जन्मे विश्वनाथ पाटेकर को दुनिया ने बाद में नाना पाटेकर के नाम से जाना। उन्होंने अपने अभिनय सफर की शुरुआत मराठी रंगमंच से की और आगे चलकर हिंदी तथा मराठी फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई।

1978 की फिल्म ‘गमन’ से उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ। इसके बाद परिंदा, क्रांतिवीर, अग्निसाक्षी, खामोशी: द म्यूजिकल, अब तक छप्पन, अपहरण, राजनीति, नटसम्राट और वेलकम जैसी फिल्मों में उन्होंने बिल्कुल अलग-अलग रंग दिखाए।

‘क्रांतिवीर’ ने बनाया जन-जन का अभिनेता

1994 की ‘क्रांतिवीर’ नाना पाटेकर के करियर की सबसे प्रभावशाली फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म में उनके अभिनय ने व्यवस्था, भ्रष्टाचार और आम आदमी के आक्रोश को एक तीखा सिनेमाई स्वर दिया।

इसी फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान मिला। परिंदा के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला और अग्निसाक्षी के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। यानी उनके खाते में कुल तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार रहे।

संवाद बोलते नहीं थे, संवाद को जीते थे

नाना पाटेकर की आवाज और संवाद अदायगी उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी। क्रांतिवीर के गंभीर और आक्रोश से भरे संवाद हों या वेलकम का हास्य—उन्होंने हर शैली में अपनी अलग छाप छोड़ी।

‘वेलकम’ में उनका किरदार उदय शेट्टी आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है।
उनका छोटा-सा संवाद “कंट्रोल उदय, कंट्रोल” आज भी लोगों की जुबान पर है। वहीं क्रांतिवीर के उनके आक्रोशपूर्ण संवादों ने एक दौर में युवाओं के बीच जबरदस्त प्रभाव पैदा किया।

उनकी खासियत यह थी कि उनके संवादों में केवल शब्द नहीं होते थे—आवाज का उतार-चढ़ाव, आंखों की चमक और चेहरे की कठोरता मिलकर किरदार को जीवित कर देते थे।

खलनायक से लेकर हास्य अभिनेता तक—हर रंग में सफल

नाना पाटेकर को केवल गंभीर भूमिकाओं का अभिनेता मानना उनके अभिनय संसार को सीमित करना होगा।

परिंदा में उनका खतरनाक और मानसिक रूप से जटिल किरदार, अग्निसाक्षी में जुनूनी पति, अब तक छप्पन में पुलिस अधिकारी और वेलकम में हास्य से भरपूर उदय शेट्टी—हर भूमिका में उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी।

यही विविधता उन्हें अपने दौर के दूसरे अभिनेताओं से अलग करती थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर उन्हें असाधारण विविधता और रचनात्मकता वाला कलाकार बताते हुए कहा कि उनके किरदार पीढ़ियों तक याद किए जाएंगे।

सम्मानों की लंबी सूची

नाना पाटेकर को अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। इसके अलावा उन्हें कई फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया और भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया।

उनकी उपलब्धियां केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहीं। मराठी सिनेमा और रंगमंच में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।

पर्दे से बाहर भी समाज के लिए काम

नाना पाटेकर के व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनका सामाजिक कार्य भी रहा। वे नाम फाउंडेशन से जुड़े रहे, जिसके माध्यम से किसानों और ग्रामीण समुदायों की मदद के लिए काम किया गया। उनके निधन पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित अनेक लोगों ने उनके अभिनय के साथ-साथ सामाजिक प्रतिबद्धता को भी याद किया।

एक कलाकार, जिसकी नकल नहीं की जा सकती

नाना पाटेकर उन अभिनेताओं में रहे जिन्हें देखकर दर्शक केवल किरदार नहीं देखते थे, बल्कि अभिनेता की अपनी मौजूदगी भी महसूस करते थे।

उनकी आवाज में गुस्सा था, तो दर्द भी था। उनकी आंखों में कठोरता थी, तो संवेदनशीलता भी। वे खलनायक बने तो डर पैदा किया, नायक बने तो संघर्ष की आवाज बने और कॉमेडी की तो दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर दिया।

नाना पाटेकर का अभिनय किसी एक शैली में कैद नहीं था।

आज उनका शरीर हमारे बीच नहीं है, लेकिन क्रांतिवीर का आक्रोश, परिंदा की गंभीरता, अब तक छप्पन की पुलिसिया सख्ती, नटसम्राट की संवेदना और वेलकम की कॉमेडी—इन सबके किरदार उन्हें लंबे समय तक दर्शकों के बीच जीवित रखेंगे।

भावभीनी श्रद्धांजलि

पर्दे पर गरजती वह आवाज आज खामोश हो गई,
लेकिन नाना पाटेकर का अभिनय भारतीय सिनेमा में हमेशा बोलता रहेगा।

नाना पाटेकर को विनम्र श्रद्धांजलि।
ॐ शांति।

Azamgarh News
Author: Azamgarh News

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